मेरे सपनों का भारत’ में विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों से रची विकसित भारत की तस्वीर

 21 सितंबर 2026

मेरे सपनों का भारत’ में विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों से रची विकसित भारत की तस्वीर
मेरे सपनों का भारत’ में विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों से रची विकसित भारत की तस्वीर
मेरे सपनों का भारत’ में विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों से रची विकसित भारत की तस्वीर

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘मेरे सपनों का भारत’ पहल ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण की सोच को अभिव्यक्ति का मंच दिया। जांजगीर-चांपा जिले के सभी विद्यालयों में आयोजित चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए चित्रों और शब्दों के माध्यम से विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की अपनी परिकल्पना प्रस्तुत की।
    चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों और रेखाओं के माध्यम से अपने सपनों के भारत की तस्वीर उकेरी। वहीं भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विकसित भारत-2047, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, नारी सशक्तिकरण, नशामुक्त भारत, शिक्षित भारत, डिजिटल साक्षरता, ई-गवर्नेंस, अंतरिक्ष और भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में आधुनिक, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के साथ सामाजिक जागरूकता एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना भी दिखाई दी।
’1,206 विद्यालयों में 1.29 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता’
    जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार जिले के 1,206 विद्यालयों में आयोजित प्रतियोगिताओं में प्राथमिक स्तर के 56,248, पूर्व माध्यमिक स्तर के 37,798 तथा हाई एवं हायर सेकेंडरी स्तर के 35,789 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस प्रकार कुल 1,29,835 विद्यार्थियों ने चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और विचारों को सामने रखा।
’विद्यार्थियों के साथ पालक और जनप्रतिनिधि भी बने सहभागी’
    विद्यालय स्तर पर आयोजित इन प्रतियोगिताओं में पालकों, नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। इससे कार्यक्रम को व्यापक जनभागीदारी मिली और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा एवं विचारों को साझा करने के लिए प्रोत्साहन मिला।
    ‘मेरे सपनों का भारत’ पहल ने विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता का मंच ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें यह सोचने और अभिव्यक्त करने का अवसर भी दिया कि वे आने वाले भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं। चित्रों और भाषणों में उभरती उनकी कल्पनाओं ने विकसित भारत के प्रति नई पीढ़ी की सोच, आकांक्षाओं और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता की भावना को सामने रखा।